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’किसान’ और ’लोहार’ जनजाति को मान्यता देने की मांग की किसान सभा ने, कहा : विधानसभा पारित करें प्रस्ताव

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🔹Kisan Sabha demanded recognition of ‘Kisan’ and ‘Lohar’ tribes, said: Assembly should pass the resolution

✒️रायपूर(पुरोगामी न्यूज नेटवर्क)

रायपुर(दि.10डिसेंबर):-छत्तीसगढ़ किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा ने सरगुजा और बलरामपुर जिलों में रहने वाले ’किसान’ और ’लोहार’ जनजाति के लोगों को नगेशिया और अगरिया आदिवासी मानते हुए उन्हें अनुसूचित जनजाति की मान्यता देने की मांग की है। इस संबंध में राष्ट्रपति के नाम पर आज एक ज्ञापन जिलाधीश सरगुजा को सौंपा गया।

आज जारी एक बयान में छत्तीसगढ़ किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते व आदिवासी एकता महासभा के महासचिव बालसिंह ने कहा कि वर्तमान में इन दोनों जिलों में किसान और लोहार जनजाति बहुलता में निवास करती है, जो वास्तव में नगेसिया और अगरिया जनजाति ही है। इनकी आबादी इस समय लगभग तीन लाख है। ’किसान’ आदिवासियों को नगेसिया जनजाति का दर्जा देने की मांग पर यहां लगातार आंदोलन होते रहा है। अतः नगेसिया जनजाति के साथ ’किसान’ तथा अगरिया के साथ ’लोहार’ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि इस जनजाति को आरक्षण का लाभ मिल सके और इसे गैर–आदिवासियों द्वारा जारी भूमि की लूट से बचाया जा सके।

उल्लेखनीय है कि संसद के इस सत्र में केंद्र सरकार द्वारा संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां) संशोधन बिल, 2022 लाया जा रहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ की 42 आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति की मान्यता देने का प्रस्ताव रखा गया है। हिज्जे की त्रुटियों सहित छोटी–मोटी विसंगतियों के कारण आदिवासियों के ये समुदाय आज तक अनुसूचित जनजाति की मान्यता से वंचित हैं। प्रस्तावित विधेयक में इन खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है।

किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा ने विधेयक का स्वागत करते हुए मांग की है कि ’किसान’ तथा ’लोहार’ के नाम से पहचाने जाने वाले नगेसिया और अगरिया आदिवासियों के साथ भी न्याय किया जाए तथा संशोधन विधेयक में नगेसिया और अगरिया के साथ ’किसान’ और ’लोहार’ भी जोड़ा जाएं। उन्होंने कहा है कि इस जनजाति के सेटलमेंट रिकॉर्ड में ’किसान’ और ’लोहार’ दर्ज होने के कारण इस समुदाय के लोग जनजाति की मान्यता से वंचित है।

उन्होंने कहा कि नगेसिया जनजाति के लोगों के साथ इनके रोटी–बेटी के संबंध हैं और इनकी रिश्तेदारियां छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर और रायगढ़ जिलों के साथ ही झारखंड और ओडिशा राज्य तक फैली हुई है। झारखंड और ओडिशा में ’किसान’ को ’नगेसिया’ के समकक्ष रखते हुए जनजाति की मान्यता वर्षों पहले दे दी गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह विसंगति जारी है और इसके लिए राज्य में 15 वर्षों तक राज करने वाली भाजपा स्पष्ट रूप से जिम्मेदार है।

किसान सभा और आदिवासी एकता महासभा ने इस राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी भाजपा सांसदों से अपील की है कि ’किसान’ और ’लोहार’ आदिवासियों के साथ जारी अन्याय को दूर करने के लिए संशोधन विधेयक में ”किसान’ और ’लोहार’ जनजाति को जोड़ने के लिए आवश्यक पहलकदमी करें। उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार से भी आग्रह किया है कि इस संबंध में विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित करें।

 

*Kisan Sabha demanded recognition of ‘Kisan’ and ‘Lohar’ tribes, said: Assembly should pass the resolution*

Raipur. The Chhattisgarh Kisan Sabha and Adivasi Ekta Mahasabha have demanded recognition of Scheduled Tribes for the people of ‘Kisan’ and ‘Lohar’ tribes living in Surguja and Balrampur districts as Nagesia and Agaria tribes. In this regard, a memorandum in the name of the President was submitted to the District Collector, Surguja today.

In a statement issued today, Chhattisgarh Kisan Sabha President Sanjay Parate and General Secretary of Adivasi Ekta Mahasabha Balsingh said that at present the majority of kisan and lohar tribes reside in these two districts, which are actually Nagesia and Agaria tribes. Their population at present is about three lakhs. There has been a continuous movement here demanding the status of Nagesia tribe to the ‘kisan’ tribals. Therefore, ‘kisan’ should be associated with Ngesia tribe and ‘lohar’ with Agaria, so that these tribes can get the benefit of reservation and it can be saved from the loot of land by non-tribals.

It is noteworthy that in this session of Parliament, the Constitution (Scheduled Tribes) Order (Fifth) Amendment Bill, 2022 is being brought by the Central Government, in which it has been proposed to recognize 42 tribal communities of Chhattisgarh as Scheduled Tribes. Due to minor discrepancies including spelling errors, these communities of tribals have been deprived of the recognition of Scheduled Tribes till date. An attempt has been made to remove these loopholes in the proposed bill.

Kisan Sabha and Adivasi Ekta Mahasabha have welcomed the bill and demanded that justice should also be done which are known as ‘Kisan’ and ‘Lohar’ in Nagesia and Agariya tribes and in the amendment bill, ‘Kisan’ and ‘Lohar’ should also be added. They have said that the people of this community are deprived of the recognition of the tribe due to the land settlemen records, in which they are registered as ‘kisan’ and ‘lohar’

They said that the kisan have Roti–Beti relations with the people of Nagesia tribe and their kinship extends to Jashpur and Raigarh districts of Chhattisgarh state as well as Jharkhand and Odisha states. In Jharkhand and Odisha, the kisan tribe has been recognized years ago by equating ‘Kisan’ with ‘Nagesia’, while in Chhattisgarh the discrepancy continues and the BJP, which ruled the state for 15 years, is clearly responsible for this.

Kisan Sabha and Adivasi Ekta Mahasabha have appealed to all the BJP MPs representing this state to take the necessary steps to include ‘Kisan’ and ‘Lohar’ tribes in the amendment bill to remove the injustice done to ‘Kisan’ and ‘Lohar’ tribals. They have also urged the Congress government in the state to pass a resolution in this regard in the assembly.

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