Home नागपूर शहर में बेखौफ़ दौड़ रहे हैं “पुलिस” लिखे निजी वाहन

शहर में बेखौफ़ दौड़ रहे हैं “पुलिस” लिखे निजी वाहन

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🔸यातायात कानून और नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं खुद कानून के रखवाले

✒️नागपूर(पुरोगामी न्युज नेटवर्क)

नागपूर(दि.23एप्रिल):-एक समय देश में ऐसा भी दौर था जब पुलिस महकमे में हवलदार से लेकर बड़े अफसर अपनी नई-पुरानी साइकिलों में डंडा लटकाकर सरकार का हुकूम बजाते थे.समय के साथ-साथ बड़े अफसरों के पास दो पहिया वाहन लूना,स्कूटर,बाईक,कारें,जीप,वैन आयी.परंतु हवलदार और छोटे पुलिस कर्मचारीयों की डंडा लटकी साइकिलें बंद नहीं हुई.
सभी कर्मचारियों को अपने कम वेतन और बड़े अफसर के रूतबे का खयाल जो था.परंतु वर्तमान समय में देश में पुलिस प्रशासन में कार्यरत पुलिस कर्मचारीयों में आर्थिक रुप से हुए क्रांतिकारी बदलाव से छोटे कर्मचारियों और बड़े अफसरों के बीच का अंतर दूर हो गया हैं.देश में पुलिस प्रशासन के कर्मचारियों के रहन- सहन,खान-पान,मकान-बंगलों को देखकर आज यह तय कर पाना मुश्किल हैं कि पुलिस प्रशासन में कौन हवलदार हैं और कौन अफसर!

राज्य में किसी भी सरकारी और गैर सरकारी विभागों के कर्मचारियों और व्यक्तियों द्वारा अपने निजी वाहनों पर पुलिस, प्रेस, डाॅक्टर, वकील, महापौर, उप महापौर, विरोधी पक्ष नेता, महावितरण, न्यायाधीश,महाराष्ट्र शासन मंत्री, विधायक, सांसद आदि आदि लिखना कलम 134(6),महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम 1989 सह कलम 177,मोटर वाहन कानून 1988 के तहत अपराध हैं.
इस अपराध में पकड़े जाने पर दोषी वाहन चालकों पर 500 रुपये समायोजन शुल्क (तडजोड) जुर्माने का प्रावधान हैं.वाहन चालकों के दूसरी बार गल्ती करने पर 1500 रुपये जुर्माने का प्रावधान हैं.सभी वाहन चालकों को इस मोटर वाहन कानून,नियमों और जुर्माने के बारें में पता होने पर भी शहर में दो पहिया, चार पहिया वाहनों पर वाहन चालक कुछ भी लिखने से बाज नहीं आ रहे हैं.हद तो तब हो रही हैं जब कानून की रक्षा करने वाले पुलिस कर्मचारी ही अपने निजी वाहनों पर पुलिस लिखकर मोटर वाहन कानून का सरासर उल्लंघन कर रहे हैं.

हद तो तब और भी ज्यादा हो रही हैं जब हर चौराहे और गली कूंचों,पेड़ों-वाहनों की आड़ में छुपकर बिना हेल्मेट,मास्क पहने वाहन चालकों को झपटकर बड़ी ही फुर्ती से पकड़ने वाली यातायात पुलिस और उसके उड़न दस्ते को ऐसे वाहन नजर ही नहीं आते.यातायात पुलिस यातायात कानून और नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले ऐसे वाहन चालकों की धरपकड़ करने से आखिर क्यों कतराती हैं?शहर में राजनैतिक,धार्मिक और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों के निजी वाहनों पर भी इसी प्रकार के नामों को लिखने का काफी प्रचलन बढ़ता जा रहा हैं.विभिन्न संगठनों के इन पदाधिकारियों द्वारा अपने वाहनों पर पार्टी,संगठन और पद को लिखकर आम जनता के बीच अपना रुतबा हासिल कराने करने की होड़ सी मची हुई हैं.

यातायात पुलिस की आंखों के सामने से और हर चौराहे पर लगी तिसरी आंख ( सीसी टीवी कैमरे) के सामने से ऐसे नाम लिखें वाहनों के गुजरने के बाद भी ऐसे वाहन चालकों पर कानूनी कार्यवाही नहीं की जा रही हैं.इसी प्रकार यातायात पुलिस वाहनों की नंबर प्लेट पर नंबर में लिखें भाऊ,दादा,ठाकुर,यादव,नाना,बाबा जैसे नाम लिखें होने पर कभी-कभी ही कार्यवाही करती हुई नजर अवश्य आती हैं परंतु फिर भी ऐसे विवादास्पद नंबर प्लेट के वाहन अभी भी शहर की सड़कों पर बेखौफ़ होकर दौड़ रहे हैं.यातायात पुलिस ने मोटर वाहन कानून और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी वाहन चालकों पर कठोर कार्यवाही करने की जरूरत हैं.

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